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Sunday, December 19, 2010

भगत मुंशी राम जी का जन्मदिन - Bhagat Munshi Ram

संत सत्गुरु भगत मुंशीराम जी महाराज (19-12-1906 से 29-06-1998)

ऐसे बहुत कम लोग मैंने देखे हैं जो अपना जन्म दिन मनाने की अनुमति हरग़िज़ नहीं देते. जन्म-मरण के चक्र से बाहर जाने का जिनका लक्ष्य हो वे  ऐसा करेंगे. भगत मुंशीराम जी का आज  (19 दिसंबर)  जन्मदिन है. अपने जीवन काल में उन्होंने किसी को अनुमति नहीं दी कि कोई उनका जन्मदिन मनाए. उनका चोला छूटे 14 वर्ष हुए हैं. आज यहाँ केवल सूचना और संदर्भ के लिए लिख देना चाहता हूँ. उनके बारे में विस्तृत जानकारी के लिए एक लिंक यहाँ दिया गया है. --> भगत मुंशीराम जी महाराज


भाई अजब बना संसार

भाई अजब बना संसार।
देख देख मोहे हांसी आवेरंग तेरे करतार ।।
पहले लड़ाते हिन्दु मुस्लिमगाय सूर आधार।
अब लड़ाई हिन्दू सिख मेंजो हैं इक परिवार ।।
हिन्दु पढ़ते गीता भागवतसिख साहिब दरबार।
सांच समझ बिन सब ही बह गएलोभ मोह की धार ।।
समोहं सर्व भूतेषुयही है गीता सार।
एक नूर ते सब जग उपज्योसार साहिब दरबार ।।
धर्म पंथ कोई गलत नहीं हैअच्छे देत विचार।
क्योंकर बने मंदिर गुरुद्वारेसोचो मेरे यार ।।
सांच कहूँ तो कोई न मानेझूठा जग व्यवहार।
मन रचना सभी है यारोमाया का विस्तार ।।
फकीर नमाणा मानव पंथीकहता अर्ज़ गुज़ार।
मानवता के पंथ चलोजो इस युग में रखवार ।।

Saturday, December 11, 2010

संतमत और नर-नारी – Bhagat Munshi Ram


भगत मुंशीराम

कबीर साहिब ने लिखा हैः-
काम काम सब कोई कहे, काम न चीन्हे कोय।
जेती मन की कल्पना, काम कहावे सोय ।।
अहंकार और कामना को ही नर-नारी कहा गया है. मन में अपने अहंकार की वजह से कामना या इच्छा का उठना ही नारी करना है. कबीर साहिब ने इसी लिए यह भी कहा:-
नारी तो हम भी करी, जाना नहीं विचार।
जब जाना तब परिहरी, नारी बड़ी विकार ।।
इसका अर्थ यह है कि मेरे मन में कामना उठी थी, यह न जान सका कि यह कोई विचार है या ख्याल है. जब समझ आई तब इस कामना रूपी नारी को छोड़ा, यह तो बड़े विकार पैदा करती है.
तो सन्तों ने इच्छा को ही नारी कहा है, यही इच्छा आगे स्थूल रूप में नर और नारी पैदा करती है. नर से अहंकार की वजह से कुछ लिया जा सकता है और नारी में नर से शक्ति ग्रहण कर के अपने गर्भ में रख कर सृष्टिक्रम को चलाने के लिए नर-नारी पैदा करने की शक्तियाँ दीं.